यहां रहने वाले 75 साल के पॉवेल लॉरेनुक अपनी बेटी से मिलने ब्रिटेन पहुंचे थे। पोलैंड लौटने के लिए उनका लीड्स-ब्रेडफोर्ड एयरपोर्ट से जीडांस्क (1668 किमी) का टिकट बुक था। लेकिन गलती से वह माल्टा (लंदन से दूरी करीब 2900 किमी) पहुंच गए।
भाषा ने बढ़ाई मुसीबत
पॉवेल रिटायर्ड इंजीनियर हैं और उन्हें पोलिश के अलावा कोई भाषा नहीं आती। गलती से वे लीड्स-ब्रेडफोर्ड एयरपोर्ट से माल्टा जाने वाले विमान में सवार हो गए।
माल्टा पहुंचने पर पॉवेल सकते में आ गए। उन्होंने एक टैक्सी वाले को टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर पर चलने को कहा। टैक्सी वाले ने यह कहते हुए माफी मांगी कि उसे पोलिश नहीं आती।
पॉवेल की परेशानी तब और बढ़ गई जब उन्हें पता लगा कि उनके पास पैसे कम बचे हैं, उनका फोन काम नहीं कर रहा और वहां की भाषा नहीं समझ सकते। तभी एक पोलिश समझने वाली महिला उनके पास आई और परेशानी पूछी। महिला ने पॉवेल की बात उनकी बेटी से कराई और पोलैंड की फ्लाइट में टिकट बुक कराया।
पोलैंड की फ्लाइट में बैठने से पहले पॉवेल ने टिकट फ्लाइट स्टाफ को टिकट दिखाया और तस्दीक की कि विमान पोलैंड ही जा रहा है। पॉवेल की बेटी लुसाइना ने बताया- उस वक्त मेरे पास फोन आया था। मैंने देखा कि कॉल माल्टा से था। मुझे उसी वक्त लगा कि कहीं कुछ गलत हुआ है। फिर मैंने देखा कि कोई वॉट्सऐप पर मैसेज लिख रहा है। मैं रोने लगी और डर गई। पापा एक दूसरे देश में थे। मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि वो वहां कैसे पहुंचे।
लुसाइना ने यह भी कहा- मैं उन्हें लेकर चिंतित थी। मुझे यही चिंता थी कि अगर कोई उनकी मदद नहीं करेगा तो उनका वापस लौटना मुश्किल होगा। क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे, फोन काम नहीं कर रहा था। सही मायने में वह अकेले थे। लेकिन सबकुछ ठीक हो गया।
लुसाइना के मुताबिक- पापा ने कहा कि वह अगले साल मेरे पास लंदन नहीं आना चाहते। अब उनकी फ्लाइट में बैठने की इच्छा नहीं है। माल्टा में पॉवेल की मदद करने वाली कैमिला निकोलस ने बताया- वह काफी नर्वस थे। उनसे बातचीत करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
बुधवार को जारी इस विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ दशकों से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से असर डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2001-10 के दौरान दशकीय तापमान सामान्य से 0.23 डिग्री अधिक रहा जबकि 2009-18 के बीच यह 0.37 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने रिपोर्ट के हवाले से ट्वीट कर बताया कि पिछले साल देश में चक्रवात, बिजली गिरने, भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश से 1,428 लोगों की जान गई।
1,428 में से लगभग आधी (688) मौतें बाढ़ से हुईं। केरल की बाढ़ में 223 लोगों ने जान गंवाई।
उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 590 लोगों की मौत हुई।
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《网络安全审查办法》答记者问
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