सुप्रीम कोर्ट ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के सरकार के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। अदालत ने इस मामले में शुक्रवार को कहा कि हम इस पर विचार करेंगे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगा है।
सरकार का फैसला आरक्षण की सीमा का उल्लंघन- याचिकाकर्ता
कारोबारी तहसीन पूनावाला ने सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले से अधिकतम 50 फीसदी आरक्षण देने की सीमा का उल्लंघन होता है।
सरकार शीत सत्र में सवर्णों को 10% आरक्षण देने के लिए 124वां संविधान संशोधन लाई थी। यह लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है। इसे राष्ट्रपति की ओर से भी मंजूरी मिल गई है। गुजरात, उत्तरप्रदेश, झारखंड जैसे कुछ राज्यों में यह लागू भी हो गया है।
आरक्षण का लाभ सामान्य वर्ग के गरीबों को शिक्षा और नौकरियों में मिलेगा। हालांकि ये 10% आरक्षण एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए पहले से लागू 49% आरक्षण से अलग है। आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग के तमाम-वर्ग-जाति संप्रदाय के लोगों को 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण मिलेगा।
आरक्षण की कोशिश में नरसिंहा राव सरकार रही थी फेल
देश के पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इसे खारिज कर दिया था।
राहुल ने भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रियंका की राजनीति में एंट्री को लेकर उन्होंने कहा- उनके राजनीति में आने को लेकर कई सालों से चर्चा चल रही थी। लेकिन तब उनके बच्चे छोटे थे। प्रियंका अपने बच्चों का ख्याल रखना चाहती थीं, अब वे बड़े हो गए हैं।
भाजपा और बीजद एक जैसी
राहुल ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘बीजद और भाजपा के मॉडल एक जैसे हैं। मोदी और पटनायक में संबंध हैं। भ्रष्टाचार मामलों की वजह से पटनायक मोदी के दबाव में हैं। वे मोदी का मौन रहकर समर्थन करते हैं। पटनायक निरंकुश हैं लेकिन उनमें मोदी की तरह नफरत नहीं है।''
'नए रोजगार पैदा न होना समस्या'
उन्होंने कहा, "भारत में रोजगार का संकट है। समस्या है कि यहां रोजगार के नए अवसर नहीं मिल रहे। चीन सभी को पछाड़ रहा है। चीन में ऑटोमेशन रोजगार पैदा करने के लिए समस्या क्यों नहीं बनी? जब मैं मानसरोवर गया, मुझे वहां कई मंत्री मिले, उन्होंने बताया कि नए रोजगार पैदा करने में कोई समस्या नहीं। असल मुद्दा ये है कि अगर आप उत्पादन कर रहे हैं और तकनीकी से जुड़े हैं, तो कोई समस्या नहीं।''
Friday, January 25, 2019
Thursday, January 17, 2019
बेटी से मिलने ब्रिटेन गए थे पिता, पोलैंड लौटने के लिए गलत फ्लाइट में बैठकर माल्टा पहुंच गए
यहां रहने वाले 75 साल के पॉवेल लॉरेनुक अपनी बेटी से मिलने ब्रिटेन पहुंचे थे। पोलैंड लौटने के लिए उनका लीड्स-ब्रेडफोर्ड एयरपोर्ट से जीडांस्क (1668 किमी) का टिकट बुक था। लेकिन गलती से वह माल्टा (लंदन से दूरी करीब 2900 किमी) पहुंच गए।
भाषा ने बढ़ाई मुसीबत
पॉवेल रिटायर्ड इंजीनियर हैं और उन्हें पोलिश के अलावा कोई भाषा नहीं आती। गलती से वे लीड्स-ब्रेडफोर्ड एयरपोर्ट से माल्टा जाने वाले विमान में सवार हो गए।
माल्टा पहुंचने पर पॉवेल सकते में आ गए। उन्होंने एक टैक्सी वाले को टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर पर चलने को कहा। टैक्सी वाले ने यह कहते हुए माफी मांगी कि उसे पोलिश नहीं आती।
पॉवेल की परेशानी तब और बढ़ गई जब उन्हें पता लगा कि उनके पास पैसे कम बचे हैं, उनका फोन काम नहीं कर रहा और वहां की भाषा नहीं समझ सकते। तभी एक पोलिश समझने वाली महिला उनके पास आई और परेशानी पूछी। महिला ने पॉवेल की बात उनकी बेटी से कराई और पोलैंड की फ्लाइट में टिकट बुक कराया।
पोलैंड की फ्लाइट में बैठने से पहले पॉवेल ने टिकट फ्लाइट स्टाफ को टिकट दिखाया और तस्दीक की कि विमान पोलैंड ही जा रहा है। पॉवेल की बेटी लुसाइना ने बताया- उस वक्त मेरे पास फोन आया था। मैंने देखा कि कॉल माल्टा से था। मुझे उसी वक्त लगा कि कहीं कुछ गलत हुआ है। फिर मैंने देखा कि कोई वॉट्सऐप पर मैसेज लिख रहा है। मैं रोने लगी और डर गई। पापा एक दूसरे देश में थे। मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि वो वहां कैसे पहुंचे।
लुसाइना ने यह भी कहा- मैं उन्हें लेकर चिंतित थी। मुझे यही चिंता थी कि अगर कोई उनकी मदद नहीं करेगा तो उनका वापस लौटना मुश्किल होगा। क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे, फोन काम नहीं कर रहा था। सही मायने में वह अकेले थे। लेकिन सबकुछ ठीक हो गया।
लुसाइना के मुताबिक- पापा ने कहा कि वह अगले साल मेरे पास लंदन नहीं आना चाहते। अब उनकी फ्लाइट में बैठने की इच्छा नहीं है। माल्टा में पॉवेल की मदद करने वाली कैमिला निकोलस ने बताया- वह काफी नर्वस थे। उनसे बातचीत करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
बुधवार को जारी इस विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ दशकों से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से असर डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2001-10 के दौरान दशकीय तापमान सामान्य से 0.23 डिग्री अधिक रहा जबकि 2009-18 के बीच यह 0.37 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने रिपोर्ट के हवाले से ट्वीट कर बताया कि पिछले साल देश में चक्रवात, बिजली गिरने, भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश से 1,428 लोगों की जान गई।
1,428 में से लगभग आधी (688) मौतें बाढ़ से हुईं। केरल की बाढ़ में 223 लोगों ने जान गंवाई।
उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 590 लोगों की मौत हुई।
भाषा ने बढ़ाई मुसीबत
पॉवेल रिटायर्ड इंजीनियर हैं और उन्हें पोलिश के अलावा कोई भाषा नहीं आती। गलती से वे लीड्स-ब्रेडफोर्ड एयरपोर्ट से माल्टा जाने वाले विमान में सवार हो गए।
माल्टा पहुंचने पर पॉवेल सकते में आ गए। उन्होंने एक टैक्सी वाले को टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर पर चलने को कहा। टैक्सी वाले ने यह कहते हुए माफी मांगी कि उसे पोलिश नहीं आती।
पॉवेल की परेशानी तब और बढ़ गई जब उन्हें पता लगा कि उनके पास पैसे कम बचे हैं, उनका फोन काम नहीं कर रहा और वहां की भाषा नहीं समझ सकते। तभी एक पोलिश समझने वाली महिला उनके पास आई और परेशानी पूछी। महिला ने पॉवेल की बात उनकी बेटी से कराई और पोलैंड की फ्लाइट में टिकट बुक कराया।
पोलैंड की फ्लाइट में बैठने से पहले पॉवेल ने टिकट फ्लाइट स्टाफ को टिकट दिखाया और तस्दीक की कि विमान पोलैंड ही जा रहा है। पॉवेल की बेटी लुसाइना ने बताया- उस वक्त मेरे पास फोन आया था। मैंने देखा कि कॉल माल्टा से था। मुझे उसी वक्त लगा कि कहीं कुछ गलत हुआ है। फिर मैंने देखा कि कोई वॉट्सऐप पर मैसेज लिख रहा है। मैं रोने लगी और डर गई। पापा एक दूसरे देश में थे। मैं समझ ही नहीं पा रही थी कि वो वहां कैसे पहुंचे।
लुसाइना ने यह भी कहा- मैं उन्हें लेकर चिंतित थी। मुझे यही चिंता थी कि अगर कोई उनकी मदद नहीं करेगा तो उनका वापस लौटना मुश्किल होगा। क्योंकि उनके पास पैसे नहीं थे, फोन काम नहीं कर रहा था। सही मायने में वह अकेले थे। लेकिन सबकुछ ठीक हो गया।
लुसाइना के मुताबिक- पापा ने कहा कि वह अगले साल मेरे पास लंदन नहीं आना चाहते। अब उनकी फ्लाइट में बैठने की इच्छा नहीं है। माल्टा में पॉवेल की मदद करने वाली कैमिला निकोलस ने बताया- वह काफी नर्वस थे। उनसे बातचीत करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
बुधवार को जारी इस विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ दशकों से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से असर डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2001-10 के दौरान दशकीय तापमान सामान्य से 0.23 डिग्री अधिक रहा जबकि 2009-18 के बीच यह 0.37 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने रिपोर्ट के हवाले से ट्वीट कर बताया कि पिछले साल देश में चक्रवात, बिजली गिरने, भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश से 1,428 लोगों की जान गई।
1,428 में से लगभग आधी (688) मौतें बाढ़ से हुईं। केरल की बाढ़ में 223 लोगों ने जान गंवाई।
उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा 590 लोगों की मौत हुई।
Wednesday, January 9, 2019
कोहली को ट्रॉफी उठाते देख आंखों में आंसू आ गए थे: गावस्कर
टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचते हुए 4 टेस्ट मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया. सीरीज के साथ ही टीम इंडिया ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा बरकरार रखा. टीम इंडिया की इस जीत से क्रिकेट फैंस खुश हैं. पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने कहा कि भारतीय टीम ने जब यह ट्रॉफी उठाई तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे.
बता दें कि गावस्कर को प्रेजेंटेशन सेरेमनी में मौजूद रहने का निमंत्रण नहीं मिला था. गावस्कर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया की जीत ही काफी है.
सिडनी में खेला गया चौथा और आखिरी टेस्ट पांचवें दिन बारिश के कारण ड्रॉ रहा. पहली पारी में 622 रन का विशाल स्कोर खड़ाकर और ऑस्ट्रेलिया को 300 रन पर समेटने के बाद भारत इस मैच में जीत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन बारिश ने 3-1 से उसकी जीत पर पानी फेर दिया.
गावस्कर ने कहा कि भारतीय टीम को ट्रॉफी उठाते देखकर मुझे गर्व हुआ. इस ऐतिहासिक पल को देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए. यह और भी शानदार होता अगर मैं वहां पर होता. क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया. लेकिन यह देखना बहुत था, क्योंकि मेरी भावनाएं टीम के साथ थीं. उनको जीतते हुए और ट्रॉफी उठाते हुए देखना बेहद शानदार रहा. गावस्कर इससे पहले के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के प्रेजेंटेशन सेरेमनी में मौजूद रहे थे.
गावस्कर ने की पुजारा की तारीफ
सीरीज में 521 रन बनाने वाले चेतेश्वर पुजारा की सुनील गावस्कर ने जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि 2014-15 के दौरे पर मिली असफलता से उन्होंने सीख लेते हुए अपनी बल्लेबाजी में कुछ बदलाव किए जिसका परिणाम सबके सामने है. पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया की उछाल वाली पिचों पर बढ़ियां बल्लेबाजी की. जब आप उपमहाद्धीप में खेलते हैं तो आपकी शैली दूसरी होती है, क्योंकि वहां पर गेंद ज्यादा उछाल नहीं लेती है. लेकिन आप जब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में होते हैं तो स्थितियां अलग होती हैं. पुजारा के धैर्य के बारे में सबको पता है.
बता दें कि पुजारा ने सीरीज में 3 शतक जड़ते हुए 521 रन बनाए. उन्होंने चौथे टेस्ट में 193 रन की पारी खेली. इसके लिए उन्हें मैन ऑफ दे मैच का अवॉर्ड भी मिला और साथ ही वह मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड से भी नवाजे गए.
जसप्रीत बुमराह 16वें स्थान पर बने हुए हैं जबकि मोहम्मद शमी एक पायदान ऊपर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं. चोटिल होने के कारण बाहर होने वाले रविचंद्रन अश्विन नौवें स्थान पर खिसक गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में सलामी बल्लेबाज मार्कस हैरिस को पहली पारी में 79 रन बनाने का फायदा मिला है और वह 21 स्थान की छलांग लगाकर अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 69वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजी में नाथन लियोन एक पायदान ऊपर 13वें स्थान पर पहुंच गए हैं.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद जारी इस रैंकिंग में दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच केपटाउन में खेला गया मैच भी शामिल है. दक्षिण अफ्रीका के एडेन मार्कराम पाकिस्तान के खिलाफ केपटाउन में 78 रन की पारी के दम पर फिर से शीर्ष दस में शामिल हो गए हैं. वह बल्लेबाजी रैंकिंग में सात पायदान आगे बढ़कर दसवें स्थान पर काबिज हो गए हैं.
तेम्बा वावुमा (पांच पायदान ऊपर 26वें स्थान) पहली बार शीर्ष 30 में शामिल हुए हैं जबकि कप्तान फाफ डु प्लेसिस का छह स्थान का फायदा हुआ है और अब वह 16वें स्थान पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजों में वर्नोन फिलैंडर एक पायदान ऊपर तीसरे जबकि डुआने ओलिवर चार पायदान चढ़कर 32वें स्थान पर पहुंच गए हैं. पाकिस्तानी बल्लेबाजों में असद शाफिक पांच स्थान आगे 24वें जबकि बाबर आजम 25वें स्थान पर पहुंच गए हैं.
शान मसूद 22 पायदान की छलांग लगाकर करियर की सर्वश्रेष्ठ 65वीं जबकि कप्तान सरफराज अहमद 42वें से 37वें स्थान पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजों में शाहीन अफरीदी ने 13 स्थान आगे 60वें नंबर पर पहुंच गए हैं. टीम रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं आया है. भारत 116 अंक के साथ शीर्ष पर बना हुआ है. ऑस्ट्रेलिया (101) को एक अंक का नुकसान हुआ लेकिन वह पांचवें स्थान पर बरकरार है.
बता दें कि गावस्कर को प्रेजेंटेशन सेरेमनी में मौजूद रहने का निमंत्रण नहीं मिला था. गावस्कर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टीम इंडिया की जीत ही काफी है.
सिडनी में खेला गया चौथा और आखिरी टेस्ट पांचवें दिन बारिश के कारण ड्रॉ रहा. पहली पारी में 622 रन का विशाल स्कोर खड़ाकर और ऑस्ट्रेलिया को 300 रन पर समेटने के बाद भारत इस मैच में जीत की ओर बढ़ रहा था, लेकिन बारिश ने 3-1 से उसकी जीत पर पानी फेर दिया.
गावस्कर ने कहा कि भारतीय टीम को ट्रॉफी उठाते देखकर मुझे गर्व हुआ. इस ऐतिहासिक पल को देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए. यह और भी शानदार होता अगर मैं वहां पर होता. क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया. लेकिन यह देखना बहुत था, क्योंकि मेरी भावनाएं टीम के साथ थीं. उनको जीतते हुए और ट्रॉफी उठाते हुए देखना बेहद शानदार रहा. गावस्कर इससे पहले के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के प्रेजेंटेशन सेरेमनी में मौजूद रहे थे.
गावस्कर ने की पुजारा की तारीफ
सीरीज में 521 रन बनाने वाले चेतेश्वर पुजारा की सुनील गावस्कर ने जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि 2014-15 के दौरे पर मिली असफलता से उन्होंने सीख लेते हुए अपनी बल्लेबाजी में कुछ बदलाव किए जिसका परिणाम सबके सामने है. पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया की उछाल वाली पिचों पर बढ़ियां बल्लेबाजी की. जब आप उपमहाद्धीप में खेलते हैं तो आपकी शैली दूसरी होती है, क्योंकि वहां पर गेंद ज्यादा उछाल नहीं लेती है. लेकिन आप जब ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में होते हैं तो स्थितियां अलग होती हैं. पुजारा के धैर्य के बारे में सबको पता है.
बता दें कि पुजारा ने सीरीज में 3 शतक जड़ते हुए 521 रन बनाए. उन्होंने चौथे टेस्ट में 193 रन की पारी खेली. इसके लिए उन्हें मैन ऑफ दे मैच का अवॉर्ड भी मिला और साथ ही वह मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड से भी नवाजे गए.
जसप्रीत बुमराह 16वें स्थान पर बने हुए हैं जबकि मोहम्मद शमी एक पायदान ऊपर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं. चोटिल होने के कारण बाहर होने वाले रविचंद्रन अश्विन नौवें स्थान पर खिसक गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में सलामी बल्लेबाज मार्कस हैरिस को पहली पारी में 79 रन बनाने का फायदा मिला है और वह 21 स्थान की छलांग लगाकर अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 69वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजी में नाथन लियोन एक पायदान ऊपर 13वें स्थान पर पहुंच गए हैं.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद जारी इस रैंकिंग में दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच केपटाउन में खेला गया मैच भी शामिल है. दक्षिण अफ्रीका के एडेन मार्कराम पाकिस्तान के खिलाफ केपटाउन में 78 रन की पारी के दम पर फिर से शीर्ष दस में शामिल हो गए हैं. वह बल्लेबाजी रैंकिंग में सात पायदान आगे बढ़कर दसवें स्थान पर काबिज हो गए हैं.
तेम्बा वावुमा (पांच पायदान ऊपर 26वें स्थान) पहली बार शीर्ष 30 में शामिल हुए हैं जबकि कप्तान फाफ डु प्लेसिस का छह स्थान का फायदा हुआ है और अब वह 16वें स्थान पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजों में वर्नोन फिलैंडर एक पायदान ऊपर तीसरे जबकि डुआने ओलिवर चार पायदान चढ़कर 32वें स्थान पर पहुंच गए हैं. पाकिस्तानी बल्लेबाजों में असद शाफिक पांच स्थान आगे 24वें जबकि बाबर आजम 25वें स्थान पर पहुंच गए हैं.
शान मसूद 22 पायदान की छलांग लगाकर करियर की सर्वश्रेष्ठ 65वीं जबकि कप्तान सरफराज अहमद 42वें से 37वें स्थान पर पहुंच गए हैं. गेंदबाजों में शाहीन अफरीदी ने 13 स्थान आगे 60वें नंबर पर पहुंच गए हैं. टीम रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं आया है. भारत 116 अंक के साथ शीर्ष पर बना हुआ है. ऑस्ट्रेलिया (101) को एक अंक का नुकसान हुआ लेकिन वह पांचवें स्थान पर बरकरार है.
Tuesday, January 1, 2019
क्या 2019 में सुलझेगी इन बड़ी घटनाओं की गुत्थी?
नए साल 2019 ने दस्तक दे दी है. साल 2018 बीत चुका है. बीते साल या उससे पहले भी कई ऐसी आपराधिक घटनाएं हुई हैं, जिन्होंने पूरे देश को दहला कर रख दिया था. इनमें से कई मामले ऐसे हैं, जिनकी लंबी जांच चल रही है. कई सबूत जुटाए जा रहे हैं. पुलिस ने रात दिन एक कर दिया है. लेकिन अभी तक ये मामले अनसुलझे हैं. अब सवाल उठता है कि क्या नए साल में इन मामलों की पहेली को जांच एजेंसियां और पुलिस हल कर पाएंगी?
बुलंदशहर हिंसाः इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह मर्डर
3 दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर के गांव महाव में गोकशी की सूचना मिलने पर स्याना थाने के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह अपने साथ करीब 9 लोगों की टीम लेकर सरकारी टाटा सूमो यूपी 13 एजी 0452 से मौके पर पहुंचे. वहां गोकशी के शक में भीड़ हंगामा कर रही थी. भीड़ का नेतृत्व बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज कर रहा था. भीड़ ने जाम लगा रखा था. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस पर हमला कर दिया.
पुलिस के वाहनों में आग लगा दी. इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल और मोबाइल लूट लिए गए और उन्हें गोली मार दी गई. जिससे उनकी मौत हो गई. जिसका इल्जाम पहले योगेश राज पर आया. फिर जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी पर. और अब पुलिस ने प्रशांत नट नामक युवक को इस मामले में हत्यारोपी बताते हुए गिरफ्तार किया है. लेकिन अभी भी इस मामले में तस्वीर साफ नहीं है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
मौत का खौफनाक खेलः बुराड़ी कांड
जुलाई 2018 के पहले सप्ताह में इस ख़बर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. बुराड़ी में रहने वाले भाटिया परिवार के 11 सदस्य एक साथ अपने घर के अंदर फांसी पर लटके पाए गए थे. जब दिल्ली पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की तो हर दिन नए खुलासे हुए. पहले एक रजिस्टर मिला. जिसमें लिखे निर्देश ही भाटिया परिवार मानता था. उसी में मौत का ये खौफनाक खेल भी लिखा था.
इस केस में सीबीआई ने पुलिस को साइकोलॉजिकल अटॉप्सी की रिपोर्ट सौंपी. जिसमें खुलासा हुआ कि भाटिया परिवार के लोग खुदकुशी नहीं करना चाह रहे थे. उनकी मौत एक हादसा है, यानी गलती से उस परिवार के सभी लोग मर गए. तफ्तीश भी यही इशारा कर रही थी. परिवार और रिश्तेदारों से बातचीत की गई. मेडिकल रिकॉर्ड देखे गए. इसके बाद पुलिस और सीबीआई इस निर्णय पर पहुंचे. हालांकि ये मामला अभी भी एक ऐसी गुत्थी है, जिसका जवाब मिलना अभी बाकी है.
नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड
साल 2013 में पुणे में नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में सीबीआई ने विरेंद्र तावड़े समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था, तब सचिन प्रकाशराव अंदुरे मामले में संदिग्ध नहीं था. हाल ही में मामले के तीन आरोपियों को महाराष्ट्र एटीएस ने गिरफ्तार किया था. जांच पड़ताल के दौरान इन तीन आरोपियों में से एक आरोपी ने एटीएस को बताया कि अंदुरे दाभोलकर हत्याकांड में सीधे तौर पर शामिल था. वह और एक अन्य आरोपी ने हत्या को अंजाम देने के लिए एक बाइक का इस्तेमाल किया था.
इसके बाद आरोपी सचिन प्रकाशराव अंदुरे को गिरफ्तार कर लिया गया था. दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करते थे. उनकी हत्या का आरोप सनातन संस्था पर है. अभी तक इस संस्था से जुड़े कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं. लेकिन इस हत्याकांड की गुत्थी अभी तक उलझी हुई है. जांच एजेंसी सारी कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है.
गौरी लंकेश हत्याकांड
सितंबर 2017 में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बंगलुरू में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बताया जाता है कि चार अज्ञात हमलावरों ने राज राजेश्वरी इलाके में गौरी के घर के बाहर उन पर काफी करीब से फायरिंग की थी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. बंगलुरू पुलिस ने बताया कि गौरी लंकेश का खून से सना शव वहां से बरामद हुआ था. गौरी साप्ताहिक मैग्जीन 'लंकेश पत्रिके' की संपादक थीं. इसके साथ ही वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं. टीवी न्यूज चैनल डिबेट्स में भी वो एक्टिविस्ट के तौर पर शामिल होती थीं. लंकेश के दक्षिणपंथी संगठनों से वैचारिक मतभेद थे.
उनकी हत्या की जांच में खुलासे होने शुरू हुए तो सुई फिर से दाभोलकर के हत्यारों की तरफ घूम गई यानी सनातन संस्था पर. जांच एसआईटी कर रही थी. लिहाजा कुछ लोगों को नामजद भी किया गया. गिरफ्तारी का दौर भी शुरू हुआ. जांच में हिंदू सनातन संस्था के कोर सदस्यों को गौरी लंकेश की हत्या के पीछे मास्टरमाइंड माना गया. उस संगठन की हिट लिस्ट में 37 नाम थे और गौरी लंकेश उनमें से एक थीं. यह मामला अभी तक जांच के दायरे में है.
बुलंदशहर हिंसाः इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह मर्डर
3 दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर के गांव महाव में गोकशी की सूचना मिलने पर स्याना थाने के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह अपने साथ करीब 9 लोगों की टीम लेकर सरकारी टाटा सूमो यूपी 13 एजी 0452 से मौके पर पहुंचे. वहां गोकशी के शक में भीड़ हंगामा कर रही थी. भीड़ का नेतृत्व बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज कर रहा था. भीड़ ने जाम लगा रखा था. इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस पर हमला कर दिया.
पुलिस के वाहनों में आग लगा दी. इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल और मोबाइल लूट लिए गए और उन्हें गोली मार दी गई. जिससे उनकी मौत हो गई. जिसका इल्जाम पहले योगेश राज पर आया. फिर जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी पर. और अब पुलिस ने प्रशांत नट नामक युवक को इस मामले में हत्यारोपी बताते हुए गिरफ्तार किया है. लेकिन अभी भी इस मामले में तस्वीर साफ नहीं है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
मौत का खौफनाक खेलः बुराड़ी कांड
जुलाई 2018 के पहले सप्ताह में इस ख़बर ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. बुराड़ी में रहने वाले भाटिया परिवार के 11 सदस्य एक साथ अपने घर के अंदर फांसी पर लटके पाए गए थे. जब दिल्ली पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की तो हर दिन नए खुलासे हुए. पहले एक रजिस्टर मिला. जिसमें लिखे निर्देश ही भाटिया परिवार मानता था. उसी में मौत का ये खौफनाक खेल भी लिखा था.
इस केस में सीबीआई ने पुलिस को साइकोलॉजिकल अटॉप्सी की रिपोर्ट सौंपी. जिसमें खुलासा हुआ कि भाटिया परिवार के लोग खुदकुशी नहीं करना चाह रहे थे. उनकी मौत एक हादसा है, यानी गलती से उस परिवार के सभी लोग मर गए. तफ्तीश भी यही इशारा कर रही थी. परिवार और रिश्तेदारों से बातचीत की गई. मेडिकल रिकॉर्ड देखे गए. इसके बाद पुलिस और सीबीआई इस निर्णय पर पहुंचे. हालांकि ये मामला अभी भी एक ऐसी गुत्थी है, जिसका जवाब मिलना अभी बाकी है.
नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड
साल 2013 में पुणे में नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में सीबीआई ने विरेंद्र तावड़े समेत अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था, तब सचिन प्रकाशराव अंदुरे मामले में संदिग्ध नहीं था. हाल ही में मामले के तीन आरोपियों को महाराष्ट्र एटीएस ने गिरफ्तार किया था. जांच पड़ताल के दौरान इन तीन आरोपियों में से एक आरोपी ने एटीएस को बताया कि अंदुरे दाभोलकर हत्याकांड में सीधे तौर पर शामिल था. वह और एक अन्य आरोपी ने हत्या को अंजाम देने के लिए एक बाइक का इस्तेमाल किया था.
इसके बाद आरोपी सचिन प्रकाशराव अंदुरे को गिरफ्तार कर लिया गया था. दाभोलकर अंधविश्वास के खिलाफ काम करते थे. उनकी हत्या का आरोप सनातन संस्था पर है. अभी तक इस संस्था से जुड़े कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं. लेकिन इस हत्याकांड की गुत्थी अभी तक उलझी हुई है. जांच एजेंसी सारी कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है.
गौरी लंकेश हत्याकांड
सितंबर 2017 में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बंगलुरू में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बताया जाता है कि चार अज्ञात हमलावरों ने राज राजेश्वरी इलाके में गौरी के घर के बाहर उन पर काफी करीब से फायरिंग की थी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. बंगलुरू पुलिस ने बताया कि गौरी लंकेश का खून से सना शव वहां से बरामद हुआ था. गौरी साप्ताहिक मैग्जीन 'लंकेश पत्रिके' की संपादक थीं. इसके साथ ही वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं. टीवी न्यूज चैनल डिबेट्स में भी वो एक्टिविस्ट के तौर पर शामिल होती थीं. लंकेश के दक्षिणपंथी संगठनों से वैचारिक मतभेद थे.
उनकी हत्या की जांच में खुलासे होने शुरू हुए तो सुई फिर से दाभोलकर के हत्यारों की तरफ घूम गई यानी सनातन संस्था पर. जांच एसआईटी कर रही थी. लिहाजा कुछ लोगों को नामजद भी किया गया. गिरफ्तारी का दौर भी शुरू हुआ. जांच में हिंदू सनातन संस्था के कोर सदस्यों को गौरी लंकेश की हत्या के पीछे मास्टरमाइंड माना गया. उस संगठन की हिट लिस्ट में 37 नाम थे और गौरी लंकेश उनमें से एक थीं. यह मामला अभी तक जांच के दायरे में है.
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