Tuesday, May 21, 2019

ऐश्वर्या पर किए ट्वीट को लेकर विवादों से घिरे विवेक ओबेरॉय- सोशल

लोकसभा चुनाव को लेकर आए एग्ज़िट पोल की चारो ओर चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर भी लोग इन रूझानों पर अपनी राय रख रहे हैं. लेकिन एग्ज़िट पोल पर किए गए एक ट्वीट को लेकर अभिनेता विवेक ओबरॉय विवादों में घिर गए हैं.

सोमवार को उन्होंने एग्ज़िट पोल को लेकर एक टिप्प्णी के साथ एक मीम शेयर किया. जिसके बाद माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म ट्विटर पर उनकी आलोचना होने लगी.

उन्होंने जो तस्वीर साझा कि जिसमें अभिनेत्री एश्वर्या राय को सलमान खान के साथ, विवेक ओबरॉय के साथ और आख़िर में पति अभिषेक बच्चन, बेटी आराध्या बच्चन के साथ दिखाया गया है. तस्वीर पर लिखा है- 'ओपिनियन पोल, एग्ज़िट पोल-नतीजे.'

विवेक के इस ट्वीट के बाद जहाँ आलोचनाएँ शुरु हो गईं वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी उन्हें नोटिस भेज इस बारे में सफ़ाई मांगी है.

विवेक ओबेरॉय ने कहा है कि वे भी आयोग से मिलकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं मगर उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने कुछ भी ग़लत किया है.

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "माफ़ी मांगने में कोई दिक़्क़त नहीं है, मगर मैंने क्या ग़लत किया है? अगर मैं कुछ ग़लत करूँगा तभी माफ़ी माँगूँगा और मैं नहीं समझता मैंने कुछ ग़लत किया है."

ट्वीट और आलोचना
विवेक ओबेरॉय ने एक तस्वीर के ज़रिए एग्ज़िट पोल के रूझानों पर तंज कसा.

इस ट्वीट के सामने आते ही इस पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. अभिनेत्री सोनम कपूर, खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा और कई पत्रकारों ने इस ट्वीट को 'शर्मनाक' बताया है.

पत्रकार मयंक गुप्ता लिखते हैं, '' बेहद बुरा मज़ाक... खासकर किसी बच्ची को भी इसमें शामिल करना काफ़ी बुरा है. ''

महिला आयोग की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, ''महिला आयोग के सामने कई ऐसी मीडिया रिपोर्ट सामने आई हैं. जिसके मुताबिक विवेक ओबरॉय ने कथित तौर पर एक बेहद अपमानजनक और महिला विरोधी ट्वीट किया है. इस तस्वीर में एक महिला और नाबालिग लड़की को दिखाया गया है. आपने कथित तौर पर चुनाव के रुझान और नतीजों पर टिप्पणी किसी महिला की व्यक्तिगत ज़िंदगी का ज़िक्र करते हुए किया है. ''

हाल ही में विवेक ओबरॉय अपनी फ़िल्म पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म को लेकर चर्चा में थे. ये फ़िल्म देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित है. इस फ़िल्म की रिलीज़ को लेकर विवाद और चुनाव को देखते हुए इसकी रिलीज़ पर चुनाव तक रोक लगा दी गई थी.

जब ऐश्वर्या ने की खुलकर बात

साल 2003 में विवेक ओबरॉय ने सलमान खान पर उन्हें धमकी देने के आरोप लगाए थे.

इसके बाद अब अभिनेत्री ऐश्वर्या राय ने कहा था कि परिवार की सलामती और अपने सम्मान के लिए अब वह सलमान के साथ कतई काम नहीं करेंगी.

उस वक़्त जारी एक बयान में ऐश्वर्या ने कहा था, "बस अब बहुत हो चुका! अपनी बेहतरी और सम्मान के साथ ही परिवार के सम्मान के लिए अब मैं सलमान ख़ान के साथ काम नहीं करुंगी."

"सलमान के साथ बिताया समय मेरी ज़िन्दग़ी में एक बुरे सपने की तरह था और मैं भगवान की शुक्रगुज़ार हूँ कि ये सब ख़त्म हो गया."

उन्होंने सलमान खान पर आरोप लगाया था कि सलमान के परिवार वालों और दोस्तों ने बार बार व्यक्तिगत और व्यावसायिक तौर पर उनकी शान्ति भंग की.

अभिनेत्री ने सलमान और उनके परिवार पर आरोप लगाया कि वे उनके बारे में लगातार अफ़वाह फ़ैलाते रहे. उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अन्य साथी कलाकारों के साथ उनके रिश्ते बिगाड़ने की भी भरपूर कोशिश की.

हालांकि ऐश्वर्या ने कभी विवेक ओबरॉय से कथित अफ़ेयर की खबरों की पुष्टि नहीं की.

साल 2007 में ऐश्वर्या राय ने बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन से शादी दी और साल 2011 में उन्होंने बेटी आराध्या को जन्म दिया.

Thursday, May 9, 2019

中美贸易战:一组图表带你看懂最新信息

美国总统特朗普宣称,将在周五(5月10日)对2000亿美元(1530亿英镑)的中国商品关税提升一倍以上,并且“不久后”将对更多产品征收关税。

尽管如此,中国还是按原计划与美国开始为期两天的谈判。

美国总统发出提升关税的威胁,正值北京试图在贸易协议上作出让步的消息传出之际。

世界最大的两个经济体已经对彼此价值数百亿美元的商品加征关税。

贸易纠纷的进一步升级,将会给企业和消费者带来更多的不确定性,对世界经济造成损害。

去年,指责中国进行不公平贸易运作的美国,开启了对华贸易战序幕。

美国不仅指责中国盗取知识产权,还希望北京改变通过政府资助来令本土企业获得不公平优势的经济政策。

美国还希望中国购买更多的美国产品,来减轻美国对华4190亿美元(3212亿英镑)的巨大贸易赤字。

贸易赤字来自于美国对外进口和出口产品数额的差异,将这个赤字减小是特朗普贸易政府的一个核心部分。

2)目前都征收了哪些关税?
去年,美国对来自中国的2500亿美元商品征收关税,而作为回应,北京也已对1100亿美元的美国产品征收关税。

今年,美国原本要在年初将2000亿美元的中国产品关税从10%提高到25%,不过这个想法后来被拖延了下来。

现在,特朗普声称将在周五执行这个计划,因为与北京的对话进展“太慢”。

在此基础上,他还声称要在“不久后”对另外3520亿美元的中国商品征收25%的关税。

3)哪些商品可能受影响?
从贸易战开始之初,受到美国关税影响的中国产品范围就涉及了从机械到到摩托车的广泛领域。

在最近一轮贸易战中,美国就对2000亿的中国产品——包括鱼类、手提包、服饰和鞋履等——加征了10%的关税。

如果按计划进行的话,这些产品的关税本周就会从10%增加到25%。

中国指控美国开展经济史上最大一场贸易战的同时,对美国的化学品、蔬菜和威士忌等等商品加征关税。

中国还战略性地对一些共和党优势州的产品加征关税,以及对像黄豆等可以从其他地方进口的商品加征关税。

4)贸易战已经波及市场了吗?
中美贸易战在过去一年一直是金融市场的一个不确定因素。这种不确定影响全世界投资者的信心,也带来了一些损失。

2018年,香港恒生指数下跌了超过13%,上证综合指数则跌了近25%。

两项指数在今年都收复了一些失地,2019年至今分别上升12%和16%。

Monday, May 6, 2019

शराबबंदी के बाद बिहार: हर एक मिनट में तीन लीटर शराब बरामद, 10वें मिनट में गिरफ्तारी

बिहार में शराबबंदी लागू होने के साल भर बाद ही इस ख़बर ने कई लोगों को चौंकाया था.

अब चौंकाने वाली दूसरी ख़बर ये है कि शराबबंदी क़ानून के तहत बिहार में अब तक एक लाख से भी ज़्यादा मामले दर्ज हुए हैं.

इतना ही नहीं डेढ़ लाख से भी ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

ये आंकड़े ख़ुद बिहार पुलिस के महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने बीबीसी को उपलब्ध कराया है.

हाल में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बछवाड़ा की रैली में कहा, "चचा (नीतीश कुमार) ने बिहार में शराबबंदी की. लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ. लोग अभी भी जम कर शराब पी रहे हैं."

"200 रुपया का बोतल 1500 में मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है? तो ये 1500 और 200 के बीच का जो अंतर 1300 रुपया है, वो किसके पॉकेट में जा रहा है?"

विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता होने के नाते ये कहा जा सकता है कि तेजस्वी का ये बयान शराबबंदी क़ानून को लेकर विपक्ष का स्टैंड भी है.

लेकिन जिस तरह से तेजस्वी शराबबंदी क़ानून की असफलता को जनता के सामने रख रहे हैं, उसे लेकर सरकार ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसे सवालों पर बार अपना पक्ष ये कहकर देते रहे हैं कि "वे बिहार को शराबमुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

"शराबबंदी का काफ़ी सकारात्मक असर रहा है. यदि शराबंबदी के व्यापक असर का विश्लेषण किया जाए तो ये बात फीकी पड़ जाएगी कि ये क़ानून थोपा गया है."

लेकिन शराबबंदी को लेकर पेश की जा रही इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है. बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू हुए अब तीन साल बीत चुके हैं.

और इन तीन सालों के दौरान शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो जिस दिन बिहार के अख़बारों में शराबबंदी क़ानून तोड़ने की ख़बर न छपी हो.

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बीबीसी को बताया कि बिहार में शराबबंदी क़ानून के तहत अब तक कुल 116,670 मामले दर्ज हुए हैं और इस सिलसिले में 161,415 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. इनमें से 13214 लोगों पर शराब का अवैध व्यापार कर रहे गिरोहों से जुड़े होने का आरोप है.

डीजीपी के मुताबिक़ शराबबंदी के इन तीन सालों की अवधि में कुल 50,63,175 लीटर शराब बरामद की जा चुकी है.

यदि शराबबंदी को मिनट दर मिनट आंका जाए तो आंकड़े गवाही देते हैं कि, "एक अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी क़ानून लागू होने के बाद से लेकर 31 मार्च, 2019 तक हर एक मिनट में कम से कम तीन लीटर शराब की बरामदगी हुई और 10 मिनट के अंदर एक गिरफ्तारी की गई."

हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शराबबंदी क़ानून को लागू करने में लापरवाही के आरोप में, उसे तोड़ने और अवैध शराब के व्यापार को संरक्षण देने के आरोप में अभी तक कुल 430 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है.

गुप्तेश्वर पांडे से मिले निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय में हमें आंकड़े और कार्रवाई के बारे में बताते हुए डीएसपी अभय नारायण सिंह इस बात को ज़ोर देकर कहते हैं कि "जिन पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें से 56 पुलिसकर्मियों पर आरोप इतने गंभीर हैं कि वे नौकरी से बर्खास्त किए जा चुके हैं. जिन 213 के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है, उनमें 26 सब इंस्पेक्टरों के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई हुई है कि अगले 10 साल तक वे थानाध्यक्ष नहीं बन पाएंगे."

ज़ाहिर है कि सब कुछ ठीक नहीं है तो ऐसे में ये सवाल उठता है कि आख़िर चूक कहां हो रही है?

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद शराबबंदी क़ानून की नाकामी को आर्थिक नज़रिए से देखते हैं.

वे कहते हैं, "इसमें पैसे का रोल सबसे अधिक है. शराबबंदी करके सरकार ने कुछ लोगों को बहुत अमीर बना दिया है. लेकिन दिक़्क़त है कि वो पैसा कहीं काग़ज़ पर नहीं है. हालांकि, ये ज़रूर है कि पुलिसकर्मियों को क़ानून के उल्लंघन में और लापरवाही में पकड़ा गया है, मगर वो बहुत छोटे लोग हैं, बहुत कम हैं. असली लोग ना तो पकड़े जा रहे हैं, ना ही उनपर बात की जा रही है. क्योंकि वे बड़े लोग हैं, सरकार से मिले हुए लोग हैं."

इस सवाल पर पटना स्थित एएन सिन्हा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज के प्रोफ़ेसर डीएम दिवाकर कहते हैं, "क़ानून तो क़ानून ही होता है. थोपने और नहीं थोपने की कोई बात ही नहीं है. लेकिन ये ज़रूर है कि इस क़ानून को ग़लत तरीक़े से इंप्लीमेंट किया गया. जितनी भी गिरफ्तारियां हुई हैं उनमें से अधिकांश शराब के कूरियर्स गिरफ्तार हुए हैं, सप्लायर्स के ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही है. इसको चूक कहिए या प्लानिंग मगर इतने अधिक लोगों पर मुक़दमे होना और गिरफ्तारी दर्शाता है कि शराबबंदी क़ानून फेल हो गया है."

लेकिन पटना हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संदीप शाही प्रोफ़ेसर डीएम दिवाकर की राय से सहमत नहीं हैं.

संदीप शाही की राय में, "शराबबंदी सामाजिक सुधार के वास्ते किया गया था. अभी भी इसका मूल मक़सद यही है. वैसे तो गिरफ्तारी और मुक़दमों के आंकड़ें इस पर ज़रूर सवाल खड़े करते हैं, लेकिन सकारात्मक असर भी पड़ा है. थानों में दर्ज सड़क दुर्घटना के मामले घटे हैं. परिवारों में ख़ुशियां लौटी हैं. लेकिन ये भी सच है कि इस क़ानून का उल्लंघन हो रहा है. केवल क़ानून बनाकर शराबबंदी नहीं की जा सकती. क्योंकि ये समाज की इच्छा और अनिच्छा से जुड़ा मसला है."

《网络安全审查办法》答记者问

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