जयंती हिल्स इलाके में स्थित कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को बचाने की कोशिश 14वें दिन भी जारी है। अभी तक एनडीआरएफ की टीम को कोई सफलता नहीं मिली है। इस बीच बचाव दल के सदस्यों ने पहली बार कहा कि खदान से बदबू आ रही है। इसके बाद मजदूरों के जीवित रहने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
350 फीट गहरी इस खदान में करीब 70 फीट पानी भरा हुआ है। 13 दिसंबर से मजदूर इसमें फंसे हुए हैं। इसे निकालने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन, पंपों की क्षमता पर्याप्त ना होने की वजह से यह काम रोक दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा क्षमता वाले पंपों को आने में अभी 4 दिन का वक्त और लगेगा।
कंपनी ने की मदद की पेशकश
इंडोनेशिया की सुरंग में फंसे 12 बच्चों के बचाव अभियान के दौरान उपकरण भेजने वाली भारतीय कंपनी किर्लोस्कर ने मेघालय सरकार से मदद की पेशकश की है। कंपनी ने कहा- हमें मजदूरों की फिक्र है। हम अभियान में हर संभव मदद करने को तैयार हैं। हम मेघालय सरकार से संपर्क में हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सभी खदान मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया जाए।
यह अच्छा संकेत नहीं- एनडीआरएफ
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने संतोष सिंह ने कहा- खदान में पानी का स्तर जांचने के लिए एक गोताखोर क्रेन के सहारे उतरा था। 15 मिनट बाद जब उसने सीटी बजाई तो उसे वापस ऊपर खींचा गया। पहली बार बचावकर्मी ने खदान से बदबू आने की बात कही। यह अच्छा संकेत नहीं है। हालांकि, चमत्कार होते हैं और हम अपनी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन, व्यवहारिक तौर पर कहूं तो इस तरह के मामलों में मौके काफी कम होते हैं। थाईलैंड में गुफा में फंसे बच्चों के मुकाबले, यहां की स्थितियां ज्यादा मुश्किल हैं।
100 हॉर्स पावर के पंप मांगे, कोई जवाब नहीं मिला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनडीआरएफ ने जिला प्रशासन से 100 हॉर्स पावर के पंप मांगे थे। लेकिन, अभी तक इस मांग पर कोई जवाब नहीं दिया गया है। बचाव स्थल पर अभी एनडीआरएफ के 70 और एसडीआरएफ के 22 सदस्य मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक मजदूरों के बारे में हमें कोई सुराग नहीं मिला है। वे किस हाल में हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
नदी का पानी भरने से फंसे थे मजदूर
ये मजदूर पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में स्थित खदान में फंस गए थे। मजदूर खुदाई कर रहे थे, इसी दौरान खदान के पास बहने वाली लैटीन नदी का पानी इसमें भर गया था। इसी पानी को निकालने के लिए पंप मंगाए गए थे, लेकिन इनकी क्षमता नाकाफी साबित हो रही है।
Thursday, December 27, 2018
Tuesday, December 18, 2018
जनवरी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, यहां से करें डाउनलोड
आईआईटी में एडमिशन के लिए आवश्यक जेईई मेन परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं. इस परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. यहां उम्मीदवार एप्लीकेशन नंबर-पासवर्ड और एप्लीकेशन नंबर-डेट ऑफ बर्थ के माध्यम से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे.
बता दें कि इस साल JEE मेंस परीक्षा का आयोजन सीबीएसई नहीं बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कर रहा है. वहीं NTA ने परीक्षा का परीक्षा की तारीख-शिफ्ट के साथ पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. उम्मीदवार पर जाकर सभी डिटेल्स चेक कर सकते हैं. इस एग्जाम को पास करने वाले सफल परीक्षार्थी देश में स्थित NIT, IIT और CFTI में एडमिशन के योग्य होंगे.
कब होगी परीक्षा
जेईई मेंस परीक्षा का आयोजन अगले साल 6 से 20 जनवरी, 2019 तक किया जाएगा. इसके अलावा 31 जनवरी परीक्षा के नजीते घोषित कर दिए जाएंगे. जेईई मेन परीक्षा में चयन होने के बाद उम्मीदवारों को जेईई एडवांस परीक्षा में हिस्सा लेना होता है. इस बार 16 हजार वीं रैंक लाने पर भी उम्मीदवारों का एडमिशन हो सकेगा.
दो बार परीक्षा
पहले जेईई मेन परीक्षा का आयोजन साल में एक बार होता था, जबकि अब यह परीक्षाएं दो बार होंगी. इस परीक्षा में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों को दो बार मौका मिलेगा. बता दें कि जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन के लिए आवेदन 1 सितंबर 2018 को शुरू हुआ था जो 30 सितंबर 2018 खत्म हो गए थे
कैसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट या आप इस डायरेक्ट लिंक पर भी जा सकते हैं. वहां मांगी गई जानकारी भरकर आप अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.
बता दें कि इस साल JEE मेंस परीक्षा का आयोजन सीबीएसई नहीं बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कर रहा है. वहीं NTA ने परीक्षा का परीक्षा की तारीख-शिफ्ट के साथ पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है. उम्मीदवार पर जाकर सभी डिटेल्स चेक कर सकते हैं. इस एग्जाम को पास करने वाले सफल परीक्षार्थी देश में स्थित NIT, IIT और CFTI में एडमिशन के योग्य होंगे.
कब होगी परीक्षा
जेईई मेंस परीक्षा का आयोजन अगले साल 6 से 20 जनवरी, 2019 तक किया जाएगा. इसके अलावा 31 जनवरी परीक्षा के नजीते घोषित कर दिए जाएंगे. जेईई मेन परीक्षा में चयन होने के बाद उम्मीदवारों को जेईई एडवांस परीक्षा में हिस्सा लेना होता है. इस बार 16 हजार वीं रैंक लाने पर भी उम्मीदवारों का एडमिशन हो सकेगा.
दो बार परीक्षा
पहले जेईई मेन परीक्षा का आयोजन साल में एक बार होता था, जबकि अब यह परीक्षाएं दो बार होंगी. इस परीक्षा में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों को दो बार मौका मिलेगा. बता दें कि जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन के लिए आवेदन 1 सितंबर 2018 को शुरू हुआ था जो 30 सितंबर 2018 खत्म हो गए थे
कैसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट या आप इस डायरेक्ट लिंक पर भी जा सकते हैं. वहां मांगी गई जानकारी भरकर आप अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.
Tuesday, December 11, 2018
बिजली गिरने से 40 मिनट पहले आपको बता देगा एप, स्थानीय भाषाओं में भी मिलेंगे अलर्ट
केंद्र सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ऐसा एप विकसित किया है, जो बिजली गिरने की चेतावनी 30 से 40 मिनट पहले दे देगा। इसका नाम ‘दामिनी’ रखा गया है। यह एप बिजली गिरने की समयपूर्व चेतावनी देने के साथ इसके बचाव की भी जानकारी देता है। इसे गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा विकसित इस एप पर 6 महीने से काम चल रहा था। इसे बनाने वाली टीम के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुनील पवार ने बताया कि यह एप बिजली गिरने की चेतावनी के अलावा इससे सुरक्षा कैसे करनी चाहिए, प्राथमिक मेडिकल उपचार कैसे करें यह जानकारी भी देता है। खेत में काम करते वक्त, यात्रा के दौरान, घर के आसपास काम करते वक्त, बिजली गिरने की चेतावनी मिले तो कैसे बचाव करें, यह चित्र के साथ बताया गया है।
अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा में दिखेगा : एप खोलने के बाद आप जिस लोकेशन पर हैं, वहां का मैप दिखाने वाला सर्किल आएगा। यह सर्किल 20 किमी की डायमीटर में अगले 40 मिनट में होने वाली बिजली चेतावनी के बारे में अलर्ट करेगा। बिजली गिरने वाली है या नहीं इसका संदेश सर्किल के नीचे अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखेगा। अभी अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखता है, आगे इसे रीजनल भाषा में भी लाने की उम्मीद है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में बहुत सारे लोग खेती किसानी के कामों के लिए अपने अपने घरों से बाहर निकलते हैं। बिजली गिरने पर उनके चपेट में आने की आशंका ज्यादा बनी रहती है। यह एप खेती किसानी कामगारों के अलावा सभी लोगों के लिए उपयोग में आ सकता है। अरब महासागर में भारत का आधा हिस्सा प्रायद्वीप की तरह है, इसलिए ये मानसूनी हवाएं भारत के बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित करती हैं। इस एप से हम अपना बेहतर बचाव कर सकते हैं।
विकसित देशों में बचाव का सिस्टम हमसे बेहतर
डॉ. सुनील पवार का कहना है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी बिजली गिरती है, लेकिन मौत भारत में ही सबसे ज्यादा होती हैं। 2017 में ही बिजली गिरने से देशभर में 3 हजार से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। इसकी वजह सिर्फ यह थी कि अन्य विकसित देशों में चेतावनी देने की बेहतर व्यवस्था है। अब इस एप के विकसित होने के बाद हम भी बेहतर बचाव कर सकते हैं। भारत में खूब बरसात होती है। उत्तर पूर्वी राज्यों में मानसूनी हवाएं तेज रफ्तार में पहुंचती हैं, ऐसी जगहों पर बिजली गिरने की आशंका बनी रहती है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) द्वारा विकसित इस एप पर 6 महीने से काम चल रहा था। इसे बनाने वाली टीम के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुनील पवार ने बताया कि यह एप बिजली गिरने की चेतावनी के अलावा इससे सुरक्षा कैसे करनी चाहिए, प्राथमिक मेडिकल उपचार कैसे करें यह जानकारी भी देता है। खेत में काम करते वक्त, यात्रा के दौरान, घर के आसपास काम करते वक्त, बिजली गिरने की चेतावनी मिले तो कैसे बचाव करें, यह चित्र के साथ बताया गया है।
अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा में दिखेगा : एप खोलने के बाद आप जिस लोकेशन पर हैं, वहां का मैप दिखाने वाला सर्किल आएगा। यह सर्किल 20 किमी की डायमीटर में अगले 40 मिनट में होने वाली बिजली चेतावनी के बारे में अलर्ट करेगा। बिजली गिरने वाली है या नहीं इसका संदेश सर्किल के नीचे अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखेगा। अभी अलर्ट अंग्रेजी और हिंदी भाषा मे दिखता है, आगे इसे रीजनल भाषा में भी लाने की उम्मीद है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में बहुत सारे लोग खेती किसानी के कामों के लिए अपने अपने घरों से बाहर निकलते हैं। बिजली गिरने पर उनके चपेट में आने की आशंका ज्यादा बनी रहती है। यह एप खेती किसानी कामगारों के अलावा सभी लोगों के लिए उपयोग में आ सकता है। अरब महासागर में भारत का आधा हिस्सा प्रायद्वीप की तरह है, इसलिए ये मानसूनी हवाएं भारत के बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित करती हैं। इस एप से हम अपना बेहतर बचाव कर सकते हैं।
विकसित देशों में बचाव का सिस्टम हमसे बेहतर
डॉ. सुनील पवार का कहना है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी बिजली गिरती है, लेकिन मौत भारत में ही सबसे ज्यादा होती हैं। 2017 में ही बिजली गिरने से देशभर में 3 हजार से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। इसकी वजह सिर्फ यह थी कि अन्य विकसित देशों में चेतावनी देने की बेहतर व्यवस्था है। अब इस एप के विकसित होने के बाद हम भी बेहतर बचाव कर सकते हैं। भारत में खूब बरसात होती है। उत्तर पूर्वी राज्यों में मानसूनी हवाएं तेज रफ्तार में पहुंचती हैं, ऐसी जगहों पर बिजली गिरने की आशंका बनी रहती है।
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《网络安全审查办法》答记者问
近日,国家互联网信息办公室、 英国首相约 色情性&肛交集合 翰逊在感染新型冠 色情性&肛交集合 状病毒康复两 色情性&肛交集合 周后, 色情性&肛交集合 将回到唐宁街继续 色情性&肛交集合 他的全职 色情性&肛交集合 领导工作。 在首相生病期 色情性&肛交集合 间代理英...