Sunday, March 31, 2019

सेंसेक्स पहली बार 39000, क्या चुनाव से जुड़े हैं तार?

भारत में आम चुनावों का बिगुल बज चुका है और पहले चरण की वोटिंग का काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है. काउंटडाउन नई सरकार के लिए भी है और मई ख़त्म होते-होते तस्वीर साफ़ हो जाएगी कि अगली सत्ता किसके हाथ होगी.

भारत के पड़ोसियों की ही नहीं, पूरी दुनिया की नज़रें इन चुनावों पर लगी हैं. सियासत के दांव-पेंचों से जुड़ी हर ख़बर के साथ दुनियाभर के उन निवेशकों की सांसें ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिनका पैसा भारतीय बाज़ारों में लगा हुआ है और मोटे मुनाफ़े की उम्मीद में वो लगातार भारतीय बाज़ारों पर भरोसा बनाए हुए हैं.

मार्च के महीने में तो शेयर बाज़ारों को मानों पंख ही लग गए और अप्रैल की पहली तारीख़ को सेंसेक्स ने इतिहास ही रच दिया. पहली बार सेंसेक्स 39,000 के आंकड़े को भी पार कर गया.

तो भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐसा क्या हो गया कि शेयर बाज़ारों में हर तरफ़ ख़रीदारी का माहौल है या फिर ये चुनावों की वजह से है और ये सेंटिंमेंट भी कि अगली सरकार स्थिर और आर्थिक सुधारों को आगे ले जाने वाली होगी?

अकेले मार्च में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 7 फ़ीसदी से अधिक उछल गया.

कहा ये जाता है कि शेयर बाज़ार अटकलों पर अधिक चलता है. कहावत भी है....बॉय ऑन रूमर्स एंड सेल ऑन न्यूज़ (अफ़वाहों पर ख़रीदो और ख़बर आने पर बेच दो). तो बाज़ार में ऐसी क्या अटकलें चल रही हैं कि हर कोई शेयरों में ख़रीदारी करता हुआ दिख रहा है?

आर्थिक मामलों के जानकार सुदीप बंद्योपाध्याय कहते हैं, "बाज़ार का चतुर खिलाड़ी वही है जो राजनीतिक या आर्थिक फ़ैसलों का तुरंत विश्लेषण कर पाता हो, उस फ़ैसले का दूरगामी असर क्या होगा और कितना होगा. मसलन अमरीका का केंद्रीय बैंक जब भी कुछ अहम घोषणा करता है तो इसका असर दुनियाभर के शेयर बाज़ारों पर होता है. लेकिन इस घोषणा का फ़ायदा उठाने के लिए निवेशक को फॉर्मूला रेसर जैसी तेज़ी दिखानी होती है."

लेकिन सुदीप मानते हैं कि शेयर बाज़ार की मौजूदा रैली विदेशी निवेशकों के बूते आई है.

रिकॉर्ड ख़रीदारी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफ़पीआई) ने रिकॉर्ड ख़रीदारी की है. मार्च में अब तक एफ़पीआई 34 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक की ख़रीदारी कर चुके हैं, जो कि भारतीय शेयर बाज़ार के इतिहास में अब तक किसी महीने में सबसे अधिक ख़रीदारी का रिकॉर्ड है.

दिल्ली स्थित एक सिक्योरिटीज़ ब्रोकरेज़ फ़र्म से जुड़े रिसर्च हेड आसिफ़ इक़बाल कहते हैं कि एफ़पीआई की ये रणनीति वाक़ई चौंकाने वाली है. विदेशी निवेशकों ने शेयरों के अलावा डेट मार्केट में भी मोटी रक़म डाली है और मार्च में तक़रीबन 13 हज़ार करोड़ रुपये शेयरों के मुक़ाबले अधिक सुरक्षित माने जाने वाले डेट मार्केट में लगाया है. यानी विदेशी निवेशकों का मार्च का कुल निवेश देखें तो ये 43 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का हो जाता है.

हालाँकि मार्च में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी म्यूचुअल फंड्स ने 15,654 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी. तो घरेलू और विदेशी निवेशकों की रणनीति में ये अंतर क्यों है?

आसिफ़ इक़बाल कहते हैं, "मार्च में म्यूचुअल फंड्स पर रिडम्पशन का दबाव रहता है. बड़ी संख्या में लोग म्यूचुअल फंड्स से पैसा निकालते हैं. इसके अलावा चुनाव भी चल रहे हैं, बाज़ार में पैसे की ज़रूरत है."

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भी कुछ वजहों से विदेशी निवेशकों ने नफ़े के लिए भारत का रुख़ किया है. सुदीप बंद्योपाध्याय कहते हैं, "यूरोप और अमरीका में कारोबारी गतिविधियां कुछ सुस्त हुई हैं. यहाँ तक कि कुछ अर्थशास्त्री इसे मंदी के संकेत तक मान रहे हैं. ऐसे में मुनाफ़े के लिए विदेशी निवेशकों को ज़बर्दस्त खपत वाले भारतीय बाज़ार मुफ़ीद लग रहे हैं."

अमरीका में मंदी की आशंका
अमरीकी बॉन्ड बाज़ार में उलटा यील्ड कर्व देखने को मिला है. ऐसा अक्सर तब देखने को मिलता है, जब लंबी अवधि के डेट इंस्ट्रूमेंट की यील्ड छोटी अवधि के डेट इंस्ट्रूमेंट की यील्ड से कम हो जाती है. हर मंदी से पहले अमरीका में ऐसा यील्ड कर्व देखने को मिला है और इसे मंदी का संकेत माना जाता है.

हालाँकि अमरीका में मंदी आएगी ही, ये ज़रूरी नहीं है. अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा कहते हैं, "अभी मंदी की घोषणा कर देना जल्दबाज़ी है. हमें अमरीका में इस महीने के विकास दर के आंकड़ों का इंतज़ार करना चाहिए. साथ ही ये भी देखना चाहिए कि डोनल्ड ट्रंप सरकार इसकी समीक्षा किस रूप में करती है."

एक और फ़ैक्टर है जो भारतीय बाज़ारों को अभी रास आ रहा है. कच्चा तेल नियंत्रण में है और जब विदेशी निवेशक डॉलर लेकर आ रहे हैं तो रुपये की सेहत तो सुधरनी ही है. डॉलर के मुक़ाबले रुपया मज़बूत हुआ है और अब एक डॉलर की क़ीमत तक़रीबन 69 रुपये है, जो पिछले साल अक्तूबर में साढ़े 74 रुपये थी.

करेंसी एक्सपर्ट एस सुब्रमण्यम कहते हैं, "कच्चे तेल की क़ीमतों का नियंत्रण में होना बड़ी वजह है. भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा पेट्रोल-डीज़ल की ख़रीद पर ख़र्च करनी होती है. ज़ाहिर है जब तेल सस्ता मिलेगा तो विदेशी मुद्रा की बचत तो होगी है. उस पर से विदेशी फंडों का भारत में निवेश और समय-समय पर रिज़र्व बैंक की डॉलर नीलामी की प्रक्रिया से रुपये में मज़बूती आई है."

सस्ते क़र्ज़ की उम्मीद

इसके अलावा एक और उम्मीद ने भारतीय शेयर बाज़ारों को पंख लगाए हैं और वो है सस्ते क़र्ज़ की उम्मीद. अगले महीने दो अप्रैल से भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक होगी. तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में रेपो रेट (वह दर जिस पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उधारी देता है) में कटौती का फ़ैसला हो सकता है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 25 मार्च को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाक़ात की थी, हालाँकि शक्तिकांत दास ने इस मुलाक़ात को 'सामान्य मुलाक़ात' बताया था. उन्होंने कहा, "परंपरा है कि मौद्रिक नीति की समीक्षा से पहले गवर्नर, वित्त मंत्री से मुलाक़ात करता है. तो ये इसी का हिस्सा है."

रिज़र्व बैंक ने फ़रवरी में ब्याज दरों में 0.25 फ़ीसदी कटौती की थी और अभी ये 6.25 फ़ीसदी है. 18 महीनों के लंबे इंतज़ार के बाद उसने ग्राहकों के लिए क़र्ज़ और सस्ता किया था.

आसिफ़ इक़बाल कहते हैं, "खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में है. फ़रवरी में 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी और चार महीने की ऊंचाई पर थी, लेकिन अब भी ये आरबीआई के 4 प्रतिशत के बेंचमार्क से नीचे है. ऐसे में रेपो रेट में चौथाई बेसिस प्वाइंट (0.25%) कटौती की गुंजाइश तो है ही."

Tuesday, March 19, 2019

基督城枪击案:大规模枪杀案如何改变一些国家的控枪法案

在上周五两座清真寺发生大规模枪击案后,新西兰总理杰辛达·阿德恩(Jacinda Ardern)准备宣布关于枪支法案改革的细节。

并不是每个国家都会在大规模枪击事件后修改法律,但以下是几个悲剧后彻底改变法律的实例。

澳大利亚
1996年,在澳大利亚塔斯马尼亚历史古迹亚瑟港(Port Arthur),35人死于非法获得的枪枝。

之后,澳大利亚政府要求各州全面禁止半自动及自动装载武器,并禁止一些特定型号的手枪。

同时,澳大利亚当局推出全面枪支注册及执照体系,还使得获得枪支的规定更加严格。其强制性有偿回收系统使得超过60万支枪上缴当局。

在法案修改前20年间,澳大利亚共发生过13起大规模枪击事件。而在法律修改后20多年期间,共发生过两起死亡人数超过四人的大规模枪击案。这期间墨尔本一家大学校园内还发生过一起死亡两人的枪击案,促使澳大利亚进一步修改了法律。

有研究显示,除亚瑟港枪击案外,澳大利亚死于枪击案的人数在1996年为69人,2012年为30人。而利用枪支自杀的人数也大大减少,变化幅度远大于其他自杀方式。

1996年,一名枪手在苏格兰邓伯兰小学内开枪,杀死17人。枪手所用的手枪均为合法途径获得,他拥有持枪执照。

此次事件后,苏格兰、英格兰及威尔士修改法律,全面禁止私人拥有手枪。

截止1999年春天,英国共收到165353支手枪及700吨弹药。

在此10年前,英国已经在1987年英格兰亨格福德(Hungerford)大规模枪击案后修改法律。亨格福德枪击案的凶手也持有合法武器。

此案发生后,英国禁止半自动散弹枪及步枪,也禁止了特定型号的弹药,还加强了对散弹枪的管控。

邓伯兰之后,英国出现过一次大规模枪击事件,发生于2010年的坎布里亚(Cumbria)。

而在邓伯兰枪击案后,英国持枪犯罪事件有所上升,这主要由枪支市场的变化引起,当时流行BB枪等气步枪。涉及这几种武器的犯罪行为随后被排除在枪支法律之外,纳入反社会行为法律之中。

本世纪最早几年至2016年间,除气步枪之外的枪支犯罪在英格兰及威尔士呈持续明显下降趋势,然而此期间英国犯罪率也持续下降,因此不能将枪支犯罪行为减少明确与控枪法律修改直接挂钩。

过去两年间,英国涉枪犯罪行为小幅上升,而英格兰及威尔士的暴力犯罪在一年间上升了19%。

1989年,蒙特利尔(Montreal)发生了一场针对女学生及女性教职员工的枪击案,枪手所用武器均为合法获得,引起加拿大全国上下对控枪进行讨论。

此事件使得加拿大1991年通过法律,禁止自动及半自动武器,同时在申请枪支执照过程中引入28天等待期,并加以背景审查。

之后,加拿大还要求持枪者必须通过枪支安全课程。

由于控枪讨论持续进行,加拿大还通过了另一项法律,要求持有人对所有未被禁止的武器进行登记。2012年这项规定被废止,但各界对这一决定一直争执不休。

关于加拿大控枪法令的调查也各种说法不一。

一项2004年的调查发现,“(1991年法令的通过使得)涉及枪支的自杀及谋杀事件大规模减少,同时使用枪支自杀的情况也大大下降”。

但有其他人士认为不应轻易将二者联系在一起。

1991-2011年间,由枪击导致的死亡(除自杀)出现下降,而枪支凶杀案件数量已经处于50年间最低水平。

Wednesday, March 6, 2019

इंदौर तीसरी बार अव्वल, भोपाल सबसे साफ राजधानी; छोटे शहरों में उज्जैन ने मारी बाजी

नई दिल्ली. स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के लिए देश के सबसे स्वच्छ शहरों के नाम का ऐलान बुधवार को यहां राष्ट्रपति भवन में हुआ। इस सर्वे में इंदौर लगातार तीसरी बार अव्वल रहा है। सबसे स्वच्छ राजधानियों में भोपाल पहले स्थान पर है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में अहमदाबाद और पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों में उज्जैन ने बाजी मारी है।

मंत्रालय के मुताबिक, स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 में 4237 शहरों का सर्वेक्षण 28 दिनों में किया गया। इस दौरान विभिन्न टीमों ने 64 लाख लोगों का फीडबैक लिया। साथ ही, सोशल मीडिया के माध्यम से इन शहरों के 4 करोड़ लोगों से फीडबैक लिया गया। टीम ने इन शहरों के 41 लाख फोटोग्राफ्स कलेक्ट लिए। सर्वेक्षण में शामिल शहरों की तरफ से स्वच्छता के संदर्भ में 4.5 लाख डॉक्यूमेंट्स अपलोड किए गए। 

70 कैटेगरी में दिए गए पुरस्कार:

स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के तहत कुल 70 कैटेगरी में पुरस्कार दिए गए। सबसे स्वच्छ शहर के साथ ही स्टार रैकिंग और जीरो वेस्ट मैनेजमेंट का पुरस्कार भी इंदौर को मिला। वहीं, मध्यप्रदेश को कुल 19 पुरस्कार मिले हैं। सर्वेक्षण में टॉप करने के चलते इंदौर को सफाई के लिए अब विशेष अनुदान मिलेगा। पिछली बार 20 करोड़ रुपए इंदौर को मिला था।

छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट स्वच्छता वाले राज्यों में उभरा:

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र राज्य भी स्वच्छता के संदर्भ में तेजी से उभरे हैं। इन तीनों राज्यों को बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट्स का पुरस्कार मिला है। छत्तीसगढ़ शीर्ष पर है जबकि दूसरे नंबर पर झारखंड और फिर महाराष्ट्र का नंबर है।

इंदौर इन वजहों से तीसरी बार नंबर-1:

2014 तक इंदौर देश में सफाई के मामले में 149वें नंबर पर था। लेकिन, अब स्वच्छता का ब्रांड बन चुका है। देश में नंबर-1 बनने के बाद देश के 300 शहरों के प्रतिनिधियों ने इंदौर की सफाई सिस्टम को देख चुके हैं। 100 से ज्यादा नगरीय निकायों ने इंदौर की केस स्टडी भी बुलवाई। इसमें जम्मू-कश्मीर से लेकर चेन्नई, पूणे, बेंगलुरु, जयपुर शामिल है।

देश का पहला ऐसा शहर, जिसने ट्रेंचिंग ग्राउंड को पूरी तरह खत्म कर वहां नए प्रयोग शुरू किए।
100% कचरे की प्रोसेसिंग और बिल्डिंग मटेरियल और व्यर्थ निर्माण सामग्री का कलेक्शन और निपटान।
कचरा गाड़ियों की मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस, कंट्रोल रूम और 19 जोन की अलग-अलग 19 स्क्रीन।
29 हजार से ज्यादा घरों में गीले कचरे से होम कम्पोस्टिंग का काम।

देश के पहले डिस्पोजल फ्री मार्केट। इसमें हाल ही में 56 दुकान क्षेत्र को शामिल किया है।
पहला शहर, जहां लाखों लोगों की मौजूदगी के दो जीरो वेस्ट इवेंट हुए।

भूलभुलैया की दीवार 6.5 फीट ऊंची और दो फीट चौड़ी रखी गई। इसे पार करने में 30 मिनट का समय लगता है। बीते सप्ताह इसे देखने के लिए हर दिन करीब 1000 लोग पहुंचे थे।

क्लींट को पत्नी ने दी प्रेरणा
क्लींट ने कहा, ‘‘मैंने यह पाया कि मैं उस समय थोड़ा जुनूनी था। मैंने अपनी पत्नी से पूछा, क्या मैं बर्फ से कुछ हैरान करने वाली चीज बना सकता हूं? ऐसा कुछ करने के लिए आपको ऐसे ही एक जुनूनी पार्टनर की तलाश होती है, जो आपको इस काम के लिए हां कह सके।’’

उन्होंने बताया, ‘‘मेरे स्टाफ के कर्मचारी ने मुझे बर्फ की एक भूलभुलैया यह कहते हुए बताई थी कि यह कितनी बड़ी है। जब आप बर्फ के साथ कुछ बनाते हैं तो यह कठिन होता है क्योंकि यह स्टील नहीं है।’’

क्लींट ने कहा, ‘‘कृत्रिम रूप से तैयार किया बर्फ, प्राकृतिक बर्फ से ज्यादा स्थायी होता है। अगर आप इस भूलभुलैया को देखेंगे तो पाएंगे कि इनसे टकराकर दीवार से पहले आपकी कार टूट सकती है। इसे तैयार करने में 57 हजार कैनेडियन डॉलर (करीब 30 लाख रुपए) खर्च हुए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह मानकर चल रहे थे कि यह बहुत बड़ी बनने वाली थी, लेकिन हमें जरूरत थी डाटा और ऐसे लोगों की जो इस काम को स्वीकार कर सकें।’’

क्लींट ने बताया, ‘‘गिनिज की ओर से मुझे सुबह ही ईमेल मिला मैंने तुरंत ऑनलाइन चैक किया और रिकॉर्ड देखा। यह मेरे परिवार और मैनिटोबा के लिए उत्साहित पल था।’’

《网络安全审查办法》答记者问

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